Monday, July 03, 2017

रस से सम्बंधित प्रश्न, रस किसे कहते हैं?


रस से सम्बंधित प्रश्न रस किसे कहते है


रस किसे कहते हैं?

 रस किसे कहते हैं?

'वाक्य रसात्कं कावयम्' अर्थात, रसपूर्ण वाक्य ही काव्य है। काव्य में रस का अर्थ आनंद होता है। वह आनंद जो श्रोता या पाठक को आत्म विभोर कर दे। कविता पढने व सुनने से जो आनंद की अनुभूति होती है,उसे ही रस कहते हैं।

 रस की निष्पत्ति से क्या अर्थ है?

भरतमुनि ने अपने ग्रन्थ "नाट्यशास्त्र" में रस की निष्पत्ति की परिभाषा इस प्रकार दी है- "विभावानुभावव्यभिचारीसंयोगाद्रसनिष्पत्ति:"। अर्थात -विभाव, अनुभाव, और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
366. रस के अवयव(अंग) लिखें?
रस के चार अवयव हैं-
1)-स्थायी भाव
2)-विभाव
3)-अनुभाव
4)-व्यभिचारी या संचारी भाव

 स्थायी भाव किसे कहते हैं?

मन के विकार को 'भाव' कहते हैं। जो भाव चिरकाल तक चित्त में स्थिर रहता है, उस आनंद के मोलभूत भाव को स्थायी भाव कहते हैं। इसकी संख्या दस होती है।

 विभाव किसे कहते हैं?

- जो व्यक्ति, पदार्थ अथवा बाह्य विकार अन्य व्यक्ति के ह्रदय में भावोद्रक करता है, उन कारणों को विभाव कहा जाता है। विभाव के दो भेद हैं-
(क)  आलंबन विभाव
(ख)  उद्दीपन विभाव
उदाहरण-पुष्प वाटिका में राम और जानकी घूम रहे हैं। जानकी के साथ उनकी सखियाँ हैं और राम के साथ लक्ष्मण। यहाँ जानकी के ह्रदय में जाग्रत 'रतिभाव' (स्थायी भाव) के 'आलंबन  विभाव' हैं-राम। जानकी की सखियाँ जो उन्हें राम के दर्शन में सहायता पंहुचा रही हैं, 'उद्दीपन विभाव' हैं।

 अनुभाव किसे कहते हैं?

आलंबन और उद्दीपन विभावो के कारण उत्पन्न भावो को बाहर प्रकाशित करने वाले कार्य 'अनुभाव' कहलाते है।
जैस:-राम के दर्शन से सीता का सकुचाना या चकित होना अनुभाव है। ऐसे स्थल पर राम या सीता किसी का एक-दूसरे के प्रति कटाक्षपात, संकेत, रोमांच, लज्जा आदि अनुभाव के अंतर्गत आयंगे। यहाँ राम सीता के अनुभावों के आश्रय हो सकते है और सीता, राम के अनुभावों की अर्थात ह्रदय में संचित रति आदि स्थायी भावों का कार्य,मन और वचन की चेष्टा के रूप  में  प्रकट होना ही 'अनुभाव' है।
अनुभाव के तीन भेद हैं:-
(क) कायिक
(ख) मानसिक
(ग) वाचिक

 व्यभिचारी या संचारी भाव किसे कहते है?

ये संचारी भाव स्थायी भावों के सहायक हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में घटते- बढ़ते हैं। पानी में उठने वाले और आप ही विलीन होने  वाले बुलबुले के समान संचारी भाव अलग- अलग रसों में हो सकते हैं। इनकी संख्या 33 है।
जैसे-गर्व, ग्लानि, शंका असूया, मद, दीनता आदि।

 रसों की संख्या व उनके स्थायी भाव बताएं?

रसों की संख्या दस होती है। उनके स्थायी भाव इस प्रकार है:-
रस का नाम                          स्थायी भाव
---------                         ---------
1)श्रंगार रस                        रति या प्रेम
2)हास्य रस                         हास(हँसना)
3)करुण  रस                        शोक
4)रोद्र रस                           क्रोध
5)वीर रस                           उत्साह
6)भयानक रस                     भय
7)वीभत्स रस                      जुगुत्सा (घृणा)
8)अद्भुत रस                        आश्चर्य (विस्मय)
9)शांत रस                          निर्वेद
10)वात्सल्य रस                  वत्सल (संतान-प्रेम)

 करुण रस किसे कहते हैं?

इस रस का जन्म आत्मीय या प्रियजनों का विनाश ,वियोग,धर्म पर संकट , द्र्व्यनाश आदि अनिष्ट सूचक कार्यों से होता है।इसका स्थायी भाव शोक होता है।
उदाहारण:-
"अभी तो मुकुट बंधा था माथ,
हुए अब ही हल्दी के हाथ,
खुले भी न थे लाज के बोल
खिले भी न चुम्बन शून्य कपोल।
हाय! रुक  गया यहाँ  संसार
बना सिंदूर अँगार।"

 वीर रस किसे कहते हैं?

ह्रदय के उमड़ते हुए अत्यधिक उत्साह से ही इस रस की उत्पत्ति होती है।इसका स्थायी भाव उत्साह होता है।
उदाहरण:-
"चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुख हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।"

 रोद्र रस किसे कहते हैं?

शत्रु द्वारा अपमान, शत्रु का सम्मुख आ जाना, किसी  के द्वारा बुराई या गुरुजनो की निन्दा रोद्र रस को जन्म देती है। इसका स्थायी भाव क्रोध होता है।
उदहारण:-
"कहा कैकेयी  ने सक्रोध ,दूर हो अरे निर्बोध !
 श्रृगार रस किसे कहते हैं?
रति नामक स्थायी भाव का जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से संयोग होता है, तब श्रृंगार रस उत्पन्न होता है।
इसके दो भेद हैं:-
1):- संयोग श्रृंगार
2):- विगोग श्रृंगार
377.  वियोग श्रृंगार किसे कहते हैं?
उत्कट अनुराग होने पर भी जहाँ प्रिय का समागम प्राप्त न हो वहां वियोग श्रृंगार होता है।
उदाहरण:-
"मधुबन तुम कत रहत हरे?
विरह वियोग श्यामसुंदर के ठाढ़े क्यों न जरे?"
 हास्य रस किसे कहते हैं?
जब किसी की विचित्र वेश-भूषा,हाव -भाव को देखकर हंसी आती हो ,वहाँ हास्य रस होता है। इसका स्थायी भाव हास है।
उदाहरण:-
"जब धूमधाम से जाती है बारात किसी की सजधज कर।
मन करता धक्का दे दुल्हे को,जा बेठुं घोड़े पर।।
सपने में ही मुझको अपनी शादी होती दिखती है।

 भयानक रस किसे कहते हैं?

किसी भयंकर वस्तु के दर्शन , भयंकर ध्वनि श्रवण आदि से भयानक रस की उत्पत्ति होती है। इसका स्थायी भाव भय होता है।
उदाहरण:-
"एक ओर अजगरहि  लखि, एक ओर मगराय।
विकल बटोही बीच में, परयो मुरछा खाय ।।

 वीभत्स रस किसे कहते हैं?
जब रक्त,मांस , मज्जा आदि घेर्णित वस्तुएँ तथा नेतिक पतन, आदि देखने में आएँ तब मन में जो ग्लानि पैदा होती है, वही वीभत्स रस का रूप ग्रहण कर लेती है। इसका स्थायी भाव जुगुप्सा होता है।
उदाहरण:-
"सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत,
खींचत जीभहि स्यार, अतिही आनंद उर धारत,
गिद्ध जांध को खोद- खोद के मांस उकारत,
स्वान अंगुरिन काट-काट के खात विदारत।"

 अद्भभुत रस किसे कहते हैं?

आश्चर्य जनक अथवा विचित्र वस्तुओ को देखने से अद्भुत रस की उत्पत्ति होती है। इसका स्थायी भाव आश्चर्य होता है।
उदहारण:-
"बिनु पग चले सुने बिनु काना,
कर बिनु कर्म करे विधि नाना।
आनन् रहित सकल रेड भोगी,
बिनु बानी वक्ता बड़ जोगी।"

अद्भभुत रस किसे कहते हैं?

आश्चर्य जनक अथवा विचित्र वस्तुओ को देखने से अद्भुत रस की उत्पत्ति होती है। इसका स्थायी भाव आश्चर्य होता है।
उदहारण:-
"बिनु पग चले सुने बिनु काना,
कर बिनु कर्म करे विधि नाना।
आनन् रहित सकल रेड भोगी,
बिनु बानी वक्ता बड़ जोगी।"
 शांत रस किसे कहते है?
जहाँ सुख- दुःख, चिन्ता, राग, द्वेष,  कुछ भी  नही है, वहाँ शांत रस होता है। इसका स्थायी भाव निर्वेद होता है।
उदहारण:-
"सुन मन मूढ़! सिखावन मेरो।
हरिपद- विमुख लह्यो न काहू सुख,
सठ यह समुझ सवेरो।"
 वात्सल्य रस किसे कहते हैं?
शिशुओ की क्रीडाओ से आल्हादित, जनक जननी के ह्रदय में जो आनंद की भावना जागृत होती है, उसी से वात्सल्य रस उत्पन्न होता है। इसका स्थायी भाव स्नेह होता है।
उदाहरण:-
" मैया मैं नहि माखन खायॊ।
ख्याल परे ये सखा सबे मिलि , मेरे मुख लपटायो।
देखि तुही सींके पर भाजन ऊँचे पर लटकायो।
तू ही निरखि नान्हें कर अपने मैं कैसे करिपायो।।"

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